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Showing posts with the label ------कुनामी सोरेन💕

बात है तो ये हयात है.....

बात है तो ये हयात है..........  झगड़े पसंद हैं मुझे  काश पता ये होता भी तुझे ! क्यूंकि......  कहीं न कहीं आप पूरे तो हो  आधा ही सही,  आप जुड़े तो हो ! एक नया रंग सा है,  थोड़ी कड़वा सा है,  पर रंग तो है ! बस ये रंग होना ज़रूरी है,  तेरे मेरे बीच बस बात होना ज़रूरी है ! कैसी भी हों,  बस बात चलती रहनी चाहिए  तेरे मेरे बीच बस ये रात चलती रहनी चाहिए ! क्यूंकि...... बात है,  तो बात बनती है ! क्यूंकि...... बात उस इंसान में है बात आखिर हमारी बात में है ! जब ये बात नहीं  तो ये रात नहीं !!!                      ------कुनामी सोरेन 

बात

तब बनती है कुछ बात! जब बातों में, मेरी या तुम्हारी नहीं,  हमारी बात आने लगती है......  तब बनती है कुछ बात! बाकी तो अभी तक आप,  एक दूसरे को तलाश ही रहे हो इसमें वक्त लगता है..... हम आने के लिए वक्त लगता है पर होता है......  अगर कोशिश की जाएं,  उस गति में खोया जाए तब बनती है कुछ बात! जो बात दर्द में है  सुकून में थोड़ी कम है सब ऐसा ही मानते हैं  महफ़िल भी इसी से जमाते हैं  जब महफ़िल बनने लगे  तब बनती है कुछ बात! बात बयां करोगे  औरों से मुस्कान ही मिलेगी  पर आह से वाह तक का सफर टूटे हुए शायर से ही मिलेगी शायद शायर ही बन जाओ  तब बनती है कुछ बात! कितनी सन्नाटे भरी ये घटनाएं हैं  सबकुछ बिगाड़ सी देती हैं  क्यों??????  क्यूंकि उसमें न कोई बात होती है! और तब न कोई बात बनती है!!!                             ------कुनामी सोरेन 

ज़िन्दगी

थोड़ा सा समाज के नज़रिये से ढा दिया थोड़ा अपना अंदाज़ ही बदल दिया तो वाह-वाही पक्की है! ताज्जुब तो इस बात का है हमारे दर्द पे हमें ही  तालियां मिलती है! ज़िन्दगी का जब ये पहलू समझोगे  इसे जीने में बड़ी आसानी होगी! आपका दर्द औरों का दुख कभी समान नहीं  ये बात समझनी होगी! मात्राएं हमेशा अलग रहेंगी  किसी का ज़्यादा  तो किसी का कम होगा! और ये ज़्यादा-कम सिर्फ आपका नज़रिया ही तो होगा! कभी गौर किया??  जब दर्द बाँटते हैं एक सुकून पाते हैं! मगर जब बात है आती खुद ही को गँवाने की बिखरने से पहले  खुद सँभलने की..... और ये तभी आता है जब किसी को बिखरा हुआ देखा हो या खुद बिखर चुके हों.....!!                           ------कुनामी सोरेन

मुस्कुराहट

मुस्कुराहट हर गम को आँसुओं से दिखाया नहीं जाता,  उन्हें छुपाने का हुनर रखती है मुस्कुराहट हर डर को मन में बसाया नहीं जाता,  उसे हौंसले में बदलना जानती है मुस्कुराहट ख़ुशी की गहराई तो दिल ही जानता है,   बस कुछ हद तक बयां करती है मुस्कुराहट हर थकान का एहसास नहीं होता,  उसे कम करने की हिम्मत रखती है मुस्कुराहट हर हसीन चेहरे के पीछे की उदासी को निहारा नहीं जाता,  निराश चेहरे पे फूल खिला देती है मुस्कुराहट हर गलती की सज़ा नहीं होती,  उसे माफ़ करने का ज़ज़्बा रखती है मुस्कुराहट हर दर्द पर मरहम लगाया नहीं जाता,  कुछ दर्द सहना सिखाती है मुस्कुराहट हर किस्सा सबको बताया नहीं जाता,  बिन बोले बोलना जानती है मुस्कुराहट यूँ तो हर किसी की मायूसी देखी नहीं जाती,  उस खोये सूरत को ढूँढा करती है मुस्कुराहट ऐसी ही ख़ास नहीं होती मुस्कुराहट...... हर शांत मन में उत्साह भर देती है ! हर बेजान में जान डाल देती है ! हर शोक को ख़ुशी में तब्दील कर देती है ! ये हाल हर हाल बयां करती है,  बस जाने तो कोई ठीक से पढ़ना मुस्कुराहट तो चलो थोड़ा मुस्कुराते हैं...... थोड़ा तुम हँसो,...

आगे बढ़ें क्या???

आगे बढ़ें क्या??? देखा जब एक हसीन चेहरा,  एक अलग ही एहसास हुआ धड़कने तो थी,  पर कभी उनका आभास नहीं हुआ आपने उनकी तरफ़ देखा,  उन्होंने आपकी तरफ़ देखा मानो दिल ने मिटा दी हो सारी रेखा| आँखें मिली, फिर नज़रे मिली धड़कने मानो धाक-धुक, धाक-धुक और फिर पता चला... यही तो है,  जिससे मैं था सपने में मिला! थोड़ा आगे बढ़े क्या?  बात करें क्या?  कर सकते हैं क्या?  सोचने...सोचने... सोचने... में वक्त निकल गया  उन्होंने इंतजार किया,  आपने विचार किया क्यों किया?  किसी भी रिश्ते की शुरुआत में दो चीज़ें ही होती हैं,  वो छोटा सा धक्का, जो आप खुद को देते हैं यार चल न, क्या फर्क पड़ेगा?  शुरुआत में ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा?  तू रूठेगा...मना लेंगें दिल टूटेगा... जोड़ लेंगें पर अगर.....  हमने कोशिश ही नहीं की तो?  हमने बात छेड़ी ही नहीं तो?  पता नहीं क्या होगा?  हर किसी ने यह पल कभी न कभी है भोगा| तो आगे चल जाना चाहिए जब आपको ऐसा लगे,  इस भ्रम में न जाने कितने लोग हैं ठगे यहाँ पर जो एहसास है  वो बहुत ख़ास है! फिर देखिये क्या हो...

रिश्ते पर कविता

पहल  वो दिल के मामले में ज़रूर कच्चे हैं,  इसलिए वो हमसे दूर ही अच्छे हैं| सर में ग़ुरूर नामक कीड़ा समाये हुए है सालों-साल, और आखिर में डगमगा ही जाते हैं दोनों के ताल| यहाँ तो पहले ही कुछ और हाल होता है, फिर बवाल होता है,  और फिर सवाल होता है! सच बताना..... क्या वाकई वह कोई रिश्ता भी था या था बस एक नाता? लगाव का..... मतलब का..... एक ऐसा नाता, जिसका एक दूसरे से कोई वास्ता नहीं| वह..... वह तो मात्र एक कश्ती थी,  जिस पर हम-तुम सवार थे| पर अब मानो, जैसे वह कश्ती रवाना हो चुकी हो..... हम-तुम मानो जुदा हो चुके हों| पहले इस अस्थिर कश्ती का डामाडोल संभाल,  फिर आगे बढ़| अपने अंदर बसी गलतफ़हमियों को निकाल,  फिर उनसे लड़| शर्त छोड़, बैर तोड़,  बैठ, ज़रा देख, पहल कर| सुलह कर, बात जोड़,  बाज़ी बदल, रुख मोड़| तो ज़रा पूछ, ज़रा बता,  ज़रा जता, क्या थी हम दोनों की ख़ता? वक्त बिता..... बता तुझे क्या पसंद और क्या है नापसंद?  किससे आती है तेरे चेहरे पर यह प्यारी सी मुस्कान और क्या तुझे डराती है?  क्या तू वो अंधकारमयी अतीत मेरे साथ बाँट सकती है?  वह गहरा जख्म, धु...